Friday, 9 March 2018

जब भगवान शिव ने हनुमान के रूप में लिया रूद्र अवतार


 शिव त्रिदेवों में एक देव हैं इन्हें देवों के देव भी कहते हैं| इन्हें महादेव, भोलेनाथ, शंकर, महेश, रुद्र, नीलकंठ के नाम से भी जाना जाता है| तंत्र साधना में इन्हे भैरव के नाम से भी जाना जाता है.. हिन्दू धर्म के प्रमुख देवताओं में से हैं. भगवान शिव भक्तों की पूजा से जल्द प्रसन्न होने वाले देव हैं और हर युग में अपने भक्तों की रक्षा के लिए अवतार लिए हैं.
भगवान शिव ने 12 रूद्र अवतार लिए हैं जिनमें से हनुमान अवतार को श्रेष्ठ माना गया है.

हनुमान के जन्म पर क्या कहते हैं शास्त्र 

शास्त्रों की माने तो रामभक्त हनुमान के जन्म की दो तिथि का उल्लेख मिलता है. जिसमें पहला तो उन्हें भगवान शिव का अवतार माना गया है, क्योंकि रामभक्त हनुमान की माता अंजनी जी ने भगवान शिव की घोर तपस्या की थी और साथ ही साथ उन्हें पुत्र के रूप में प्राप्त करने का वर मांगा था. तब प्रसन्न होकर भगवान शिव ने पवन देवता के रूप में अपनी रौद्र शक्ति का अंश यज्ञ कुंड में अर्पित किया था और वही शक्ति माता अंजनी के गर्भ में प्रविष्ट हुई थी. फिर चैत्र शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को हनुमानजी का जन्म हुआ  

क्या आपको पता है भगवन शिव ने हनुमान जी का अवतार क्यों लिया था 

पौराणिक कथाओ के अनुसार :-पौराणि‍क कथाओं के अनुसार जैसा की हम जानते है रावण का अंत करने के लिए भगवान विष्णु जी ने राम का अवतार धरती लोक में लिया था. उस समय सभी देवताओं ने अलग-अलग रूप में भगवान राम की सेवा करने के लिए अवतार लिया था. जिनमे भगवान शंकर ने भी अपना रूद्र अवतार लिया था और इसके पीछे वजह थी कि उनको भगवान विष्णु से दास्य का वरदान प्राप्त हुआ था. इसी प्रकार से हनुमान अवतार भी भगवान शंकर के बारह रुद्र अवतारों में से ग्यारहवें अवतार हैं . इस रूप में भगवान शंकर ने राम की सेवा भी की और रावण वध में उनकी मदद भी की थी.

Sunday, 11 February 2018

कथा १२ ज्योतिर्लिंगों की (12 jyotirlinga darshan)

लिंग पुराण के कथा के अनुसार एक बार भगवान् श्री विष्णु जी और ब्रह्मा जी में अपनी अपनी श्रेष्ठता को लेकर लड़ाई हो रही थी तभी अचानक दोनों के समक्ष एक अग्नि का विशाल शिवलिंग प्रकट हुआ ।
 तब दोनों  भगवान् ब्रह्मा जी और विष्णु जी ने उस अग्नि शिवलिंग के एक एक छोर को ढूढने का तय किया और साथ ही साथ ये भी तय किया कि जो भी पहले छोर का पता लगाकर वापस आयेगा वह सर्वश्रेष्ठ होगा तब भगवान् विष्णु जी एक वाराह का रूप धारण कर के
उस अग्नि शिवलिंग के नीचे के छोर को ढूढने चले गए और ब्रह्मा जी एक हंस का रूप धारण करके शिवलिंग के ऊपर का छोर ढूढने चले गए । वे काफी दिनों तक शिवलिंग के अपने अपने छोरों को ढूढ़ते रहे परन्तु वे सफल नहीं हुए तब उस
अग्नि शिवलिंग से भगवान्
शिव जी प्रकट हुए तब भगवान् विष्णु जी और ब्रह्मा जी को पता चला की ये तो भगवान श्री शिव है और जिनका हम न तो आदि ढूंढ़ सके और न ही अंत अर्थात हम तो व्यर्थ में ही श्रेष्टता की लड़ाई लड़ रहे थे भगवान् शिव ही सर्व श्रेष्ठ है ।
तब भगवान् श्री विष्णु जी और ब्रह्मा जी  ने भगवान् श्री शिव को सर्वश्रेष्ठ स्वीकार किया ।

पुराणों के अनुसार जैसा की हम जानते है  शिवजी की आराधना मात्र  से मनुष्य की सारी मनोकामनाये पूरी होती है। शिवलिंग पर मात्र जल चढ़ाने से भगवान शंकर प्रसन्न हो जाते  हैं।
और 12 ज्योतिर्लिंगों का दर्शन करने वाला प्राणी सबसे खुशनसीब होता है।

शिवपुराण कथा के अनुसार बारह ज्योतिर्लिंग का वर्णन और उनकी की महिमा बताई गई है जो इस प्रकार है ।
ये 12 ज्योतिर्लिंगों के नाम इस प्रकार है  मल्लिकार्जुनम्, वैद्यनाथम्, केदारनाथम्, सोमनाथम्, भीमशंकरम्, नागेश्वरम्, विश्वेश्वरम्, त्र्यंम्बकेश्वर, रामेश्वर, घृष्णेश्वरम्, ममलेश्वर व महाकालेश्वरम है।
इसी प्रकार इन सभी का दर्शन हर किसी के भाग्य में नही होता है । सिर्फ किस्मत वाले भाग्यशील लोग ही देश भर में स्थित इन ज्योतिर्लिंगों का दर्शन कर पाते हैं।